Wednesday, July 8, 2009

गरज-बरस प्यासी धरती को फिर पानी दे मौला


गरज-बरस प्यासी धरती को फिर पानी दे मौला

मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
गरज-बरस प्यासी धरती को फिर पानी दे मौला
चिडियों को दाने , बच्चों को , गुडधानी दे मौला !!

कई दिनों से आँखें पानी को तरस रही थीं और अब जब पानी बरसा तो कई दूसरी आँखें पानी से तर हो गयीं हैं,पानी उनकी झोपड़-पट्टियों को लील लिए जा रहा है....पानी ,जो सूखे खेतों को फसलों की रौनक लौटने को बेताब है,वहीं शहरों में गरीबों को लील जाने को व्यग्र...!!पानी को कतई नहीं पता है कि उसे कहाँ बरसना है और कहाँ नहीं बरसना !!
शायर ने कहा भी तो है, "बरसात का बादल है.....दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है,किस छत को बिगोना है !!
तो प्यारे दोस्तों ,यूँ तो प्रकृति हमारी दोस्त है...और सदा ही दोस्त ही बनी रही है....लेकिन हम सबने अपनी-अपनी हवस के कारण इसे मिलजुल कर अपना दुश्मन बना डाला है....प्रकृति को हमने सिर्फ़ अपने इस्तेमाल की चीज़ बना डाला है....और अपने इस्तेमाल के बाद अपने मल-मूत्र का संडास....ऐसे में यह कहाँ तक हमारा साथ निभा सकती है.....और जो यह हमारा साथ नहीं निभाती...तो यह हम पर कहर हो जाती है....कारण हम ख़ुद हैं...!और यह सब समझबूझकर भी यही सब करते रहने को अपनी नियति बना चुके हम लोगों को भविष्य में इस कहर से कोई भी नहीं बचा सकता.....उपरवाला भी नहीं...!!पानी भी तो हमारा दोस्त ही है....और हमारी तमाम कारगुजारियों के बावजूद भी हर साल हमारी मदद करने,हमें जीवन देने के लिए ही आता है !हम कब ख़ुद इसके दोस्त बनेंगे ??ख़ुद तो दुश्मनों के काम करना,और इसके एवज में कोई इसकी प्रतिक्रिया व्यक्त करे तो उसे पानी पी-पी कर कोसना, क्या यही मनुष्यता है??
प्यारे मनुष्यों,मैंने तुम्हें यही बताना है कि अपनी हवस को वक्त रहते लगाम दे दो ना...अपने लालच को थोड़ा कम कर दो ना....!!तुम्हारे जीवन में सुंदर फूल फिर से खिल उठेंगे....तुम्हारा जीवन फिर से इक प्यारी-सी बगिया बन जाएगा..!!जैसा कि तुम सदा से कहते रहे हो...."धरती पर स्वर्ग"...तो इस स्वर्ग को बनाने का भी यत्न करो....कि नरक बनाए जाने वाले कृत्यों से "स्वर्ग"नहीं निर्मित होता...कभी नहीं निर्मित होता....यही सच है....!!

Saturday, June 20, 2009

मैं भूत बोल रहा हूँ.....!!

भाईयों और भाईयों.......अभी कुछ दिन पहले मेरा पुराना ब्लॉग "बात पुरानी है"और जी.मेल अकाउंट के पासवर्ड को किसी शरारती भाई ने तोड़-मरोड़ दिया है....जिससे मेरे ही अकाउंटों तक मेरी पहुँच असंभव हो गई है....भूतों से आदमी की शरारत वैसे कोई नई बात तो नहीं....मगर ज्यादा शरारत ये कोई अच्छी बात नहीं है....नहीं है ना....!!भईया मेरे कौन हो आप...मेरे बाप.....मेरे बीते हुए दिन लौटा दो....लौटा दो ना.....प्लीज़.....!!उसका लिंक यह था,जिसमें मैं अब साईन इन नहीं कर पा रहा....अरे कोई है,जो इस भूत की सहायता करे....अरे कोई है....???ye ब्लॉग्गिंग हमें किस मोड़ पे ले आई.....कि कोई तो आए...और हमें बताये कि आगे क्या होगा....??
http://baatpuraanihai.blogspot.com/